"जय श्री बालाजी की"🙏
🕉️जरुरी नहीं कि काम से ही इन्सान थक जाये ,कुछ ख्यालो का बोझ भी इन्सान को थका देता है।
दिनांक:-13जुलाई:-2024
वार:-शनिवार
तिथि :-07सप्तमी:-15:05
पक्ष:-शुक्लपक्ष
माह:-आषाढ
नक्षत्र:-हस्त:-19:14
योग:-शिव (अहोरात्र)
करण:-वणिज:-15:05
चन्द्रमा:-कन्या
सुर्योदय:-05:45
सुर्यास्त:-19:19
दिशा शुल.....पूर्व
निवारण उपाय:-उङद का सेवन
ऋतु :- वर्षा ऋतु
गुलिक काल:-05:51से 07:31
राहू काल:-09:12से10:52
अभीजित....12:06से12:59
विक्रम सम्वंत .........2081
शक सम्वंत ............1946
युगाब्द ..................5126
सम्वंत सर नाम:-कालयुक्त
चोघङिया दिन
शुभ:-07:31से09:12तक
चंचल:-12:33से14:13तक
लाभ:-14:13से15:54तक
अमृत:-15:54से17:34तक
चोघङिया रात
लाभ:-19:15से20:34तक
शुभ:-21:54से23:13तक
अमृत:-23:13से00:33तक
चंचल:-00:33से01:52तक
लाभ:-04:32से05:51तक
चोघङिया का समय सूर्योदय के अनुसार है|
🌸आज के विशेष योग🌸
वर्ष का 96वा दिन,भद्रा 15:05 से 28:19,यमघण्टयोग मृत्युयोग सूर्योदय से 19:14, सूर्यपूजा,
🌺👉टिप्स 👈🌺
ईशान कोण मे सीढ़ीयां ना बनवाएं व्यक्ति के जीवन में बाधा आती है।
👏🌞सुप्रभात मित्रो🌞👏
यज्जाग्रतो दूरमुदैति दैवंतदु सुप्तस्य तथैवैति। दूरङ्गमं ज्योतिषां ज्योतिरेकंतन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु।।
जय श्री बालाजी की🙏
जय श्री मोहन दास बाबा की🙏
जय श्री कानी दादी की🙏
🙏रोट्या क देवाल्ल की जय🙏
🙏विश्व सम्राट श्री सालासर दरबार की जय हो🙏
🙏 श्री रामधाम दरबार की जय हो 🙏
🙏🛕🔔 *ॐ हनुमते नमः* 🔔🛕🙏
🚩 *श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण से*🚩
( सुन्दर काण्ड )
*🕉️1. इस प्रकार शत्रु के वेग का विचार कर उसके प्रतिकार के लिए अपने कर्तव्य का निश्चय करके महान बल और पराक्रम से संपन्न हनुमानजी ने उस समय अपना वेग बढ़ाया और उस शत्रु को मार डालने का विचार किया। तत्पश्चात आकाश में विचरते हुए वीरवानर पवनकुमार ने थप्पड़ों की मार से अक्षकुमार के उन आठों उत्तम और विशाल घोड़ों को, जो भार वहन करने में समर्थ और नाना प्रकार के पैंतरे बदलने की कला में सुशिक्षित थे, यमलोक पहुंचा दिया।*
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*🕉️2. तदनंतर वानरराज सुग्रीव के मंत्री हनुमानजी ने अक्षकुमार के उस विशाल रथ को भी अभिभूत कर दिया। उन्होंने हाथ से ही पीट कर रथ की बैठक तोड़ डाली और उसके हरसे को उलट दिया। घोड़े तो पहले ही मर चुके थे, अतः वह महान रथ आकाश से पृथ्वी पर गिर पड़ा।*
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*🕉️3. उस समय महारथी अक्षकुमार धनुष और तलवार ले रथ छोड़कर अंतरिक्ष में ही उड़ने लगा, ठीक वैसे ही जैसे कोई उग्रशक्ति से संपन्न महर्षि योगमार्ग से शरीर त्याग कर स्वर्गलोक की ओर चला जा रहा हो। तब वायु के समान वेग और पराक्रम वाले कपिवर हनुमानजी ने पक्षीराज गरुड़, वायु तथा सिद्धों से सेवित व्योममार्ग में विचरते हुए उस राक्षस के पास पहुंचकर क्रमशः उसके दोनों पैर दृढ़तापूर्वक पकड़ लिए।*
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*🕉️4. फिर तो अपने पिता वायुदेवता के तुल्य पराक्रमी वानरशिरोमणि हनुमान ने जिस प्रकार गरुड़ बड़े-बड़े सर्पों को घुमाते हैं, उसी तरह उसे हजारों बार घुमाकर बड़े वेग से उस युद्ध-भूमि में पटक दिया। नीचे गिरते ही उसकी भुजा, जांघ, कमर और छाती के टुकड़े-टुकड़े हो गए, खून की धारा बहने लगी, शरीर की हड्डियां चूर-चूर हो गईं, आंखें बाहर निकल आईं, अस्थियों के जोड़ टूट गए और नस-नाड़ियों के बंधन शिथिल हो गए। इस तरह वह राक्षस पवनकुमार हनुमानजी के हाथ से मारा गया।*
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*🕉️5. युद्ध में इंद्रपुत्र जयंत के समान पराक्रमी और लाल लाल आंखों वाले अक्षकुमार का काम तमाम करके वीरवर हनुमानजी प्रजा के संहार के लिए उद्यत हुए काल की भांति पुनः युद्ध की प्रतीक्षा करते हुए वाटिका के उसी द्वार पर जा पहुंचे।*
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*🌹धर्म की जय हो - अधर्म का नाश हो।🌹जय जय श्रीराम - जय हनुमान 🌹*
*🌹 श्री रामधाम सेवा संघ 62/101 सेक्टर प्रताप नगर सांगानेर जयपुर*
*🔅🔆🚩चिंतन प्रवाह🚩🔆🔅*
_*बुराई मनुष्य के बुरे कर्मों की नहीं, वरन् बुरे विचारों की देन होती है। इसलिए वह एक बार में ही समाप्त नहीं हो जाती, बल्कि स्वभाव और संस्कार का अंग बन जाती है। ऐसी स्थिति में बुराई भी भलाई जान पड़ने लगती है। इसलिए बुरे कामों से बचने के लिए सर्वप्रथम बुरे विचारों से बचना चाहिए। दुष्कर्म का फल तुरन्त भोगकर उसे शान्त किया जा सकता है, पर संस्कार बहुत काल तक नष्ट नहीं होते। वे जन्म-जन्मांतरों तक साथ-साथ चलते और कष्ट देते हैं।*_
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*🕉️शुभ प्रभात🕉️*
*🙏मंगलमय दिवस की शुभकामनाएं🙏*
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*राम राम जी*🌹🙏❄️🦚
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