संवत - 2081
सन - 2024
मास - अषाढ़ मास
पक्ष - कृष्ण पक्ष
23 जून से 05 जुलाई तक
आयन - दक्षिणायन
ऋतु - वर्षा ऋतु
22 जून शनि पड़वा 29:14
॰॰॰॰॰ प्रतिपदा का क्षय ॰॰॰॰॰
23 जून रवि द्वितीया 27:27
24 जून चंद्र तृतीया 25:24
25 जून मंगल चतुर्थी 23:12
26 जून बुध पंंचमी 20:56
27 जून गुरु षष्ठी 18:40
28 जून शुक्र सप्तमी 16:28
29 जून शनि अष्टमी 14:21
30 जून रवि नवमी 12:20
01 जुलाई चंद्र दशमी 10:27
02 जुलाई मंगल एकादशी 8:43
03 जुलाई बुध द्वादशी 7:11
04 जुलाई गुरु त्रयोदशी 5:55
04 जुलाई गुरु चतुर्दशी 28:58
॰॰॰॰ चतुर्दशी तिथि का क्षय ॰॰॰॰ 05 जुलाई शुक्र अमावस 28:27
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विक्रम संवत - 2081
सन - 2024
मास - आषाढ़ मास
पक्ष - शुक्ल पक्ष
06 जुलाई से 21 जुलाई तक
आयन - दक्षिणायन
ऋतु- वर्षा ऋतु
06 जुलाई शनि पड़वा 28:27
07 जुलाई रवि द्वितीया 29:00
08 जुलाई चंद्र तृतीया
॰॰॰॰॰ पूरा दिन ॰॰॰॰॰
09 जुलाई मंगल तृतीय 6:09
10 जुलाई बुध चतुर्थी 7:53
11 जुलाई गुरु पंचमी 10:04
12 जुलाई शुक्र षष्ठी 12:33
13 जुलाई शनि सप्तमी 15:06
14 जुलाई रवि अष्टमी 17:27
15 जुलाई चंद्र नवमी 19:20
16 जुलाई मंगल दसवीं 20:34
17 जुलाई बुध एकादशी 21:03
18 जुलाई गुरु द्वादशी 20:45
19 जुलाई शुक्र त्रयोदशी 19:42
20 जुलाई शनि चतुर्दशी 18:00
21 जुलाई रवि पूर्णिमा 15:47
॰॰॰॰॰ पर्व एवं त्यौहार ॰॰॰॰॰
22 जून शनिवार
अषाढ़ कृष्ण प्रतिपदा का क्षय
25 जून मंगलवार
अंगारकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत, बुध पश्चिम में उदय 29:05
02 जुलाई मंगलवार
योगिनी एकादशी व्रत
03 जुलाई बुधवार
प्रदोष व्रत
04 जुलाई गुरुवार
मासिक शिवरात्रि व्रत
05 जुलाई शुक्रवार
आषाढ़ अमावस
06 जुलाई शनिवार
गुप्त नवरात्रि प्रारंभ
07 जुलाई रविवार
चंद्र दर्शन, रथ यात्रा - उत्सव (श्री जगन्नाथ पुरी ), शुक्र पश्चिम में उदय 7:02
11 जुलाई गुरुवार
स्कन्द ( कुमार ) षष्ठी ( पूर्व विद्या ), संत टेेऊँराम जयंती
12 जुलाई शुक्रवार
विवस्वत सप्तमी ( पूर्व विद्या )
15 जुलाई चंद्रवार
भढली नवमी, गुप्त नवरात्रि समाप्त, मेला शरीक भवानी ( कश्मीर )
16 जुलाई मंगलवार
श्रावण संक्रांति, निरयण दक्षिणायन प्रारंभ
17 जुलाई बुधवार
हरिशयनी एकादशी व्रत, चातुर्मास्य व्रत, नियमादि प्रारंभ श्री विष्णु शयनोत्सव
19 जुलाई गुरुवार
प्रदोष व्रत
20 जुलाई शनिवार
श्री सत्यनारायण व्रत, वायु परीक्षा ( सूर्यास्त समय ), कोकिला व्रत, शिवशयनोत्सव, मेला ज्वालामुखी ( कश्मीर )
21 जुलाई रविवार
आषाढ़ी पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, व्यास पूजा
॰॰॰॰॰ विशेष सूचना ॰॰॰॰॰
(01)
विक्रम संवत 2081 में त्रयोदश ( 13 ) दिनात्मक पक्ष का फल
( विश्वघस्र पक्ष का फल )
विक्रम संवत 2081 में तिथियों की प्रत्यक्ष सूक्ष्म गणना के कारण अषाढ़ कृष्ण पक्ष ( 23 जून से 05 जुलाई 2024 ) में तेरह दिन का पक्ष घटित हो रहा है । इसका फल शास्त्रों में अशुभ एवं अनिष्टकारी बताया गया है ।
सामान्य: सूर्य -चंद्रमा की स्पष्ट गणित प्रक्रिया के बाद प्रत्येक भारतीय पंचांग में कृष्ण अथवा शुक्ल पक्ष के अंतर्गत प्रतिवर्ष पक्ष के दिन 14, 15 अथवा 16 दिन घटित हो जाते हैं अर्थात पक्ष में कोई तिथि क्षय हो जाने की स्थिति में 14, तिथि की वृद्धि अर्थात 24 घंटे से अधिक व्याप्ति-एक की एक बार से दूसरे वार के आरंभ में आगे तक चले गए, तो दो दिन व्याप्ति होने के कारण पक्ष में 16 दिन बन जाते हैं तथा यदि किसी तिथि का क्षय या वृद्धि न हुई हो तो पक्ष में 15 दिन ही होती हैं । कई बार सूर्य चंद्र की स्पष्ट गणित प्रक्रिया के कारण किसी पक्ष में दो बार तिथि का क्षय हो जाने से 13 दिन का पक्ष भी आ जाता है । इस 'विश्वघस्र पक्ष' कहते हैं । महाभारत में भी तेेरह दिन के पक्ष के अशुभत्व के संबंध में वर्णन मिलता है । अन्य शास्त्रकरों ने भी त्रयोदश दिनात्मक पक्ष के अशुभत्व के विषय में अनेकत्र प्रमाण मिलते हैं । यथा :-
'अनेकयुग साहस्त्रयाद दैवयोगात् प्रजायते । त्रयोदशदीने पक्ष: तदा संहरते जगत् ॥' ( मेघ महोदय )
अर्थात कई एक युगों में प्रजा का नाश करने के निमित्त तेरह दिन का पक्ष आता है अर्थात जिस पक्ष में तेरह दिन हो, वह पक्ष लोगों में क्लिष्ट रोग उत्पादक, महंगाई, विग्रह, उपद्रव एवं हिंसा आदि अशुभ फलकारक होता है । विश्व में किसी देश का विघटन अर्थात भूगोल में परिवर्तन होता है । समाज में सर्वत्र अशांति का वातावरण फैलता है । अन्यत्र भी इस संबंध में अशुभ फल कह गए हैं :-
' यदा च जायते पक्षस्रयोदस दिनात्मक: । भवेल्लोक क्षयो-घोरो रुण्डमुण्डमायुता मही ॥ '
त्रयोदशदीन: पक्षो भवेद् वर्ष्ठकान्तरे । तदा नगरभंग: स्यात् छत्रभंगो महर्घता ॥ '
इस त्रयोदश दिनात्मक पक्ष के प्रभाव स्वरूप विश्व एवं भारत में राजनैतिक, आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियां अस्थिर एवं अशांति पूर्ण होगी । राजनीतिक पार्टियों के मध्य विग्रह, टकराव एवं बिखराव पैदा होंगे । कहीं तोड़फोड़, हिंसा, विस्फोटक घटनाएं एवं छत्रभांग की आशंका होगी । कहीं भयंकर युद्ध का वातावरण बनने से अशान्ति बने तथा कहीं भूकंप, दुर्भिक्ष, भूस्खलन आदि प्राकृतिक प्रकोपों से भारी जानत धन हानि के योग बनते हैं । तेरह दिन के पक्ष में शास्त्रों ने विवाह, मुंडन, गृह -प्रवेश, उपनयन आदि शुभ कार्यों का निषेध माना गया है । ज्योतिर्निबन्धानुसार :-
उपनयनं परिनयन वेश्यारम्भादि कर्माणि । यात्रां द्विक्षयपक्षे कुरयात् न जिजीविषु पुरुष: ॥ '
उपरोक्त शास्त्रवाक्य को आधार मानकर परंपरावश कुछ विद्वान इस 'विश्वघस्र-पक्ष' में शुभ कार्यों का निषेध मानते आ रहे हैं, परंतु मुहूर्त चिंतामणि में कश्यप मुनि के मतानुसार केंद्र/ त्रिकोण में शुभ ग्रहस्थिति होने पर इस विश्वघस्र पक्ष का दोष समाप्त हो जाता है - अब्दायनर्तुमासोत्था: पक्षतिथ्यृक्ष-सम्भवा: । ते सर्वे नासमायान्ति केन्द्रसंसथे शुभग्रहे ॥ '
परंतु इस वर्ष त्रयोदश दिनात्मक पक्ष ( आषाढ़ कृष्ण पक्ष ) के समय शुक्र अस्त है अतएव इस पक्ष में कोई नवीन शुभ मुहूर्त नहीं होगा ।
( 02 ) कुमार षष्ठी ( 11 जुलाई बृहस्पतिवार )
कुमार ( स्कन्द ) षष्ठी व्रत पूर्व ( पंचमी ) विद्धा षष्ठी के दिन किया जाता है :- 'षष्ठी सकन्दव्रते पुर्वविद्धा ॥' ( धर्मसिन्धु ) ॥ वशिष्ठ जी के अनुसार भी :-
"कृष्णाष्टमी स्कन्दषष्ठी शिवरात्रिश्चतुरदशी ।
एता पूर्वयुता: कार्या: तिथ्यन्ते पारणं भवेत् ॥
इस साल आषाढ़ शुक्ल षष्ठी 11 जुलाई, बृहस्पतिवार, सन 2024 को पंचमीविद्धा है, अतः यह व्रत इसी दिन शास्त्र -सम्मत है ।
( 03 ) विवस्वत सप्तमी ( 12 जुलाई शुक्रवार )
यह पर्वविद्धा आषाढ़ शुक्ल पक्ष सप्तमी में मनाया जाता है । 'ब्रह्म पुराण' का वाक्य है :- पुर्वविद्धा द्विजश्रेष्ठ , कर्तव्या सप्तमीतिथि: ।'
इस वर्ष यह सप्तमी 12 जुलाई 2016 को पूर्व ( षष्ठी ) विद्धा है, अतः इस वर्ष यह 12 जुलाई, शुक्रवार को ही मनाया जाएगा ।
( 04 ) श्री सत्यनारायण व्रत ( आषाढ़ शुक्ल ) (20 जुलाई, शनिवार )
श्री सत्यनारायण व्रत प्रदोषव्यापिनी एवं चंद्रोदय - व्यापिनी पूर्णिमा के दिन किया जाता है । इस वर्ष आषाढ पूर्णिमा 21 जुलाई, 2024 को दोपहर बाद 15:47 पर समाप्त हो रही है, जिस कारण यह इस दिन ( सूर्यास्त से पहले ) प्रदोष व्यापिनी नहीं होगी । इस दिन या एक दिन पहले ( 20 जुलाई ) को पंजाब, हिमाचल, जम्मू आदि पश्चिमोत्तर प्रान्तो में प्रदोष काल लगभग 19:27 से 21:30 तक रहेगा ।
तारीख 20 जुलाई को पूर्णिमा 18:00 से प्रारंभ हो रही है । जिससे इस दिन प्रदोषव्यापिनी एवं रात्रि - व्यापिनी ( चंद्रोदय ) पूर्णिमा होगी ।अतएव इस मास का श्रीसत्यनारायण व्रत 20 जुलाई, शनिवार को ही रखना प्रशस्त होगा ।
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