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Thursday, June 20, 2024

21 june 2024

 "जय श्री बालाजी की"🙏

🕉️"मंजिल पर पहुंचने से पहले का रास्ता थकाने और हिम्मत तोड़ने वाला होता है।
दिनांक:-21जून:-2024
वार:-शुक्रवार
तिथी:-14चतुर्दशी:-07:32
पक्ष:-शुक्लपक्ष
माह:-ज्येष्ठ
नक्षत्र:-ज्येष्ठा:-18:18
योग :-शुभ:-18:41
करण:-वणिज:-07:32
चन्द्रमा:-वृश्चिक18:18/धनु
सुर्योदय:-05:37
सुर्यास्त:-19:19
दिशा शुल.....पश्चिम
निवारण उपाय:-जौं का सेवन
ऋतु :-ग्रीष्म वर्षा ऋतु
गुलीक काल:-07:25से 09:06
राहू काल:-10:47से12:29
अभीजित....12:02से12:56
विक्रम सम्वंत .........2081
शक सम्वंत ............1946
युगाब्द ..................5126
सम्वंत सर नाम:-कालयुक्त
चोघङिया दिन
चंचल:-05:43से07:25तक
लाभ:-07:25से09:06तक
अमृत:-09:06से10:47तक
शुभ:-12:29से14:10तक
चंचल:-17:33से19:14तक
चोघङिया रात
लाभ:-21:52से23:10तक
शुभ:-00:29से01:48तक
अमृत:-01:48से03:06तक
चंचल:-03:06से04:25तक
चोघङिया का समय सूर्योदय के अनुसार है|
आज के विशेष योग
वर्ष का74वा दिन,भद्रा 07:32 से19:09तक,वट सावित्री व्रत समाप्त,वटपूर्णिमा, पूर्णिमा व्रत , चम्पक चतुर्दशी (बंगाल), अन्वाधान, वज्रमुसलयोग सूर्योदय से 18:18, सूर्य आर्द्रा में 24:05,वाहन मयूर,स्त्री.पु.सू.चं. मन्वादि,अयन करिदिन,विश्व योग दिवस,
🌹 👉 टिप्स 👈🌹
तुलसी को जल चढाते समय मुंह पूर्व दिशा कि तरफ रखे।
🙏🌷सुप्रभात मित्रो🌷🙏
येनेदं भूतं भुवनं भविष्यत् परिगृहीतममृतेन सर्वम् । येन यज्ञस्तायते सप्तहोता तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
जय श्री बालाजी की🙏

*💐🍂🌹जय श्रीकृष्ण🌹🍂💐*

*🕉 प्रकीर्ण के सम्बंध में स्वामी रामजी महाराज के अमृत वचन 🕉*

*🕉1. जिसे नहीं करना चाहिए उसे करने से और जिसे करना चाहिए उसे नहीं करने से ही चिंता और भय होते हैं।*

*🕉2. जो सभी का होता है, वही हमारा होता है। जो किसी भी समय किसी का नहीं होता, वह हमारा हो ही नहीं सकता।*

*🕉3. जिस दिन सांसारिक रुचि मिटेगी, उसी दिन पर परमार्थिक रुचि पूरी हो जाएगी।*

*🕉4. साधक का जिस किसी वस्तु, व्यक्ति आदि में खिंचाव हो, उसमें वह भगवान का ही चिंतन करे।*

*🕉5. सब जगह समरूप परमात्मा को देखना समदृष्टि है और प्रकृति तथा उसके कार्य (शरीर-संसार) को देखना विषम दृष्टि है।*

*🇮🇳जय हिंद🇮🇳* *🚩जय भारत🚩*
*🙏नमस्कार🙏* *🌷सुप्रभात🌷*
*🌹धर्म की जय हो - अधर्म का नाश हो।🌹कृष्णम् वन्दे जगदगुरु।🌹*
*🌹
*🔅🔆🚩🚩🔆🔅*

_*ज्ञान की व्यवहारिकता है कि किसी से कुछ इच्छा न रखें और सब में एक ही ब्रह्म का साक्षात्कार करें। भक्ति की व्यवहारिकता है कि संसार के सारे संबंधों का आधार भगवान को माने, सहज संतोषी स्वभाव हो और कुटिलता न हो। कर्म की व्यवहारिकता यह है कि व्यक्ति स्वयं को सेवक माने और लोगों के शुभ एवम् सत्कर्मों की प्रशंसा करे। भगवान श्रीराम ने स्वयं में कोई गुण नहीं देखा, अपितु दूसरे के अवगुणों में भी गुण पक्ष को ग्रहण कर उसका उपयोग लोकहित में किया। यही ज्ञान, भक्ति और कर्म की पूर्णता है।*_

*🕉️शुभ प्रभात🕉️*
*🙏मंगलमय दिवस की शुभकामनाएं🙏*
*🌹🙏 🦚*
*राम राम जी*🌹🙏🤓
*स्वस्थ रहे तन और मन, योग ही है रोगमुक्त जीवन का मंत्र।*

*अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं।*
🌹🌹🌹🙏🦚🌹🌹🌹

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