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Saturday, June 29, 2024

30 June 2024

: "जय श्री बालाजी"🙏

🕉️एक सुखी जीवन के लिए अच्छे घर का होना जरूरी नहीं है,घर का माहोल अच्छा होना जरूरी है।

दिनांक :-30जून:-2024

वार :-रविवार 

तिथी :-09नवमी:-12:19

पक्ष:-कृष्णपक्ष

माह:-आषाढ 

नक्षत्र:-रेवती:-07:34

योग:-अतिगंड:-16:14

करण:-गर:-12:19

चन्द्रमा:-मीन07:34/मेष 

सुर्योदय:-05:40

सुर्यास्त:-19:20

दिशा शुल.....पश्चिम

निवारण उपाय:-जौं का सेवन

ऋतु :- वर्षा ऋतु 

गुलीक काल:-15:53से 17:34

‌राहू काल:-17:34से19:16

अभीजित....12:04से12:58

विक्रम सम्वंत  .........2081

शक सम्वंत ............1946

युगाब्द ..................5126

सम्वंत सर नाम:-कालयुक्त 

         चोघङिया दिन

चंचल:-07:27से09:08तक

लाभ:-09:08से10:49तक

अमृत:-10:49से12:31तक

शुभ:-14:12से15:53तक

      चोघङिया रात

शुभ:-19:16से20:34तक

अमृत:-20:34से21:53तक

चंचल:-21:53से23:12तक

लाभ :-01:50से03:09तक

शुभ :-04:27से05:46तक

चोघङिया का समय 

सूर्योदय के अनुसार है।                                  🙏आज के विशेष योग🙏                                                वर्ष का83वाँ दिन,पचंक समाप्त 07:34,भद्रा प्रारंभ 23:22से दिनांक 01/07/2024 को 10:26तक,

           🌺👉 टिप्स 👈🌺            बिस्तर पर बैठकर भोजन करने से घर में दरिद्रता आती है ।                  🌹🌞 सुप्रभात मित्रों 🌞🌹   

   धर्म वर्म नर्मद गुण ग्रामह । संतत शम तनोतु मम रामह ॥

जय श्री बालाजी की🙏


*🌹🌸🙏जय श्रीकृष्ण🙏🌸🌹*


*🌷 कुछ हास्य-व्यंग्य से सराबोर कथन🌷*


*🤓1. अपनी पत्नी की कमियों पर उन्हें कोसें नहीं, हो सकता है उन्हें इन्हीं कमियों के कारण अच्छा पति नहीं मिल पाया हो।*


*🤟2. प्रत्येक गांव में चार-पांच नारद और उनके दो-तीन व्यक्तिगत सहायक अवश्य होते हैं। इन व्यक्तिगत सहायकों का  वेतन मात्र एक चाय और दो-तीन बीड़ी प्रतिदिन होती है।* 


*🥲3. यदि जेब में पैसा न हो तो पंचर चैक कराते समय एक छोटा सा बुलबुला भी धड़कन बढ़ा देता है।*


*🤠4. मुफ्त की दारू और दूसरे की मेहरारू आदिकाल से पुरुष की पहली पसंद रही है।*


*😱5. समय बहरा है, सुनता किसी की नहीं, लेकिन अंधा नहीं है, देखता सबको है।*


*🇮🇳जय हिंद🇮🇳*         *🚩जय भारत🚩*

*🙏नमस्कार🙏*  *☝वंदे मातरम्☝*

*🙏 *

 *🔅🔆🚩चिंतन प्रवाह🚩🔆🔅*


_*जब तक सुख की चाहना रहती है, तब तक व्यक्ति दुःख से बच नहीं सकता। कारण कि सुख के आदि और अंत में दुःख ही रहता है तथा सुख से भी प्रति क्षण स्वभाविक वियोग होता रहता है।*_

_*जिसके वियोग को यह प्राणी नहीं चाहता, उसका वियोग तो हो ही जाता है, यह नियम है। तात्पर्य यह हुआ कि सुख की इच्छा को मनुष्य नहीं छोड़ता और दुःख इसको नहीं छोड़ता। कहा भी गया है कि त्याग से बड़ा कोई भी सुख नहीं है, क्योंकि त्याग बाहरी दुःख हो सकता है, किन्तु अपनी आत्मा में इससे प्रसन्नता प्राप्त होती है।*_


             *🕉️शुभ प्रभात🕉️*

 *🙏मंगलमय दिवस की शुभकामनाएं🙏*

*🌹🙏 

*राम राम जी*🌹

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