"जय श्री बालाजी की"🙏
🕉️"एक सफल व्यक्ति बनने की कोशिश मत करो,बल्कि मूल्यों पर चलने वाले व्यक्ति बनो।
दिनांक:-22जून:-2024
वार:-शनिवार
तिथि :-15पूर्णिमा:-06:37/01 प्रतिपदा:-29:13
पक्ष:-शुक्लपक्ष
माह:-ज्येष्ठ
नक्षत्र:-मूल:-17:54
योग:-शूक्ल:-16:44
करण:-बव:-06:37
चन्द्रमा:-धनु
सुर्योदय:-05:38
सुर्यास्त:-19:19
दिशा शुल.....पूर्व
निवारण उपाय:-उङद का सेवन
ऋतु :-ग्रीष्म वर्षा ऋतु
गुलिक काल:-05:44से 07:25
राहू काल:-09:06से10:48
अभीजित....12:02से12:56
विक्रम सम्वंत .........2081
शक सम्वंत ............1946
युगाब्द ..................5126
सम्वंत सर नाम:-कालयुक्त
चोघङिया दिन
शुभ:-07:25से09:06तक
चंचल:-12:29से14:10तक
लाभ:-14:10से15:52तक
अमृत:-15:52से17:33तक
चोघङिया रात
लाभ:-19:15से20:38तक
शुभ:-21:52से23:11तक
अमृत:-23:11से00:29तक
चंचल:-00:29से01:48तक
लाभ:-04:25से05:44तक
चोघङिया का समय सूर्योदय के अनुसार है|
🌸आज के विशेष योग🌸
वर्ष का75वाँ दिन,संत कबीर जयंती, पूर्णिमा पुण्य,ज्येष्ठ पूर्णिमा,वटसावित्री व्रत पारणा, राष्ट्रीय आषाढमास प्रारंभ देवस्नान पूर्णिमा (बंगाल उड़ीसा), गुरु हरगोविन्दसिंह जयंती (प्राचीन मत), ज्वालामुखी योग 06:37से17:54, ज्येष्ठ श्रुति पूर्णिमा पर्व (जैन), अमरनाथ यात्रा प्रारंभ,
🌺👉टिप्स 👈🌺
तुलसी के पौधे पर मन्जरी आते ही तोडले।
👏🌞सुप्रभात मित्रो🌞👏
यज्जाग्रतो दूरमुदैति दैवंतदु सुप्तस्य तथैवैति। दूरङ्गमं ज्योतिषां ज्योतिरेकंतन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु।।
जय श्री बालाजी की🙏
🙏🛕🔔 *ॐ हनुमते नमः* 🔔🛕🙏
🚩 *श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण से*🚩
( सुन्दर काण्ड )
*🕉️1. राजा जनक की पुत्री सीता से अपने विशेष प्रभाव से जिसे छुपा कर धारण कर रखा था, उस बहुमूल्य मणिरत्न को लेकर हनुमानजी मन ही मन उस पुरुष के समान सुखी एवं प्रसन्न हुए, जो किसी श्रेष्ठ पर्वत के ऊपरी भाग से उठी हुई प्रबल वायु के वेग से कंम्पित होकर पुनः उसके प्रभाव से मुक्त हो गया हो। तदनंतर उन्होंने वहां से लौट जाने की तैयारी की।*
38-70
*🕉️2. पवनपुत्र वानरवीर हनुमान को वहां से लौटने के लिए उद्यत जान मिथिलेशकुमारी का गला भर आया और वह अश्रुगद्गद वाणी में बोली- हनुमन! यशस्वी रघुनाथजी जिस प्रकार मेरे जीतेजी यहां आकर मुझसे मिलें, मुझे संभालें, वैसी ही बातें तुम उनसे कहो और ऐसा करके वाणी के द्वारा धर्माचरण का फल प्राप्त करो।*
39-6,10
*🕉️3. सीता की यह बात सुनकर पवनकुमार हनुमान ने माथे पर अंजलि बांधकर विनयपूर्वक उनकी बात का उत्तर दिया- भगवान श्रीराम विशेषतः आपके लिए तो युद्ध में सूर्य, इंद्र और सूर्यपुत्र यम का भी सामना कर सकते हैं। वे समुद्रपर्यंत सारी पृथ्वी को भी जीत लेने योग्य हैं। जनकनंदिनी! आपके लिए युद्ध करते समय श्रीरामचंद्रजी को निश्चय ही विजय प्राप्त होगी।*
39-13,16,17
*🕉️4. विदेहनंदिनी सीता को इस प्रकार आश्वासन दे पवनकुमार हनुमानजी ने वहां से लौटने का निश्चय करके उनसे फिर कहा- देवी! आप शोक के कारण रोदन न करें। आपके मन का भय दूर हो जाय। शोभने! जैसे शची देवराज इंद्र से मिलती हैं, उसी प्रकार आप अपने पतिदेव से मिलेंगी।*
39-47,52
*🕉️5. तब सीताजी ने कहा- कपिश्रेष्ठ! मैंने तुम्हें उत्तम से उत्तम पहचान तो दे ही दी। वीर हनुमान! इस आभूषण को ध्यानपूर्वक देख लेने पर श्रीराम के लिए तुम्हारी सारी बातें विश्वसनीय हो जाएंगी। राजकुमारी सीता के उक्त अभिप्राय को जानकर कपिवर हनुमान ने अपने को कृतार्थ समझा और प्रसन्नचित होकर थोड़े से शेष रहे कार्यों का विचार करते हुए वहां से उत्तर दिशा की ओर प्रस्थान किया।*
40-18,25
*🌹धर्म की जय हो - अधर्म का नाश हो।🌹जय जय श्रीराम - जय हनुमान 🌹*
*🌹 श्री राम
*🔅🔆🚩🚩🔆🔅*
_*भय से क्या होता है? बिना हुए भी मनुष्य आशंका कर लेता है। संदेह होने पर चेष्टाएँ विपरीत दिखायी देने लगती हैं। भय से आत्मविश्वास चला जाता है, भय से साहस जाता है, भय से प्रयत्न में कमी आती है, भय से अविश्वास होता है, भय से चिन्ता उत्पन्न होती है और भय से मृत्यु होती है। भय अनेक बुराइयों का मूल है। भय न रहने से साहस होता है और हम सच्चे भय से भी त्राण पा जाते हैं।*_
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*🕉️शुभ प्रभात🕉️*
*🙏मंगलमय दिवस की शुभकामनाएं🙏*
*🌹🙏 *
*राम राम जी*🌹🙏🎷
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